कोंडागांव | 3 अक्टूबर 2025
कोंडागांव जिले के मकड़ी ब्लॉक से एक अत्यंत गंभीर मानव तस्करी का मामला सामने आया है, जिसमें ग्राम निर्मिंडा और तोड़ी के चार आदिवासी युवकों को रोजगार का झांसा देकर तेलंगाना राज्य के मिश्रा क्षेत्र में स्टार बोरवेल कंपनी में जबरन काम करवाने और बंधक बनाने का आरोप लगा है।
पीड़ित युवकों के परिजन आज दिनांक 3 अक्टूबर को जिला कलेक्टर कार्यालय, कोंडागांव पहुंचे और लिखित ज्ञापन सौंपकर प्रशासन से युवकों की सुरक्षित रिहाई की मांग की।
परिजनों ने बताया कि गोपी देवांगन, निवासी ग्राम उरमाल, ब्लॉक देवभोग, जिला गरियाबंद, 22 अगस्त को चार युवकों को यह कहकर अपने साथ ले गया कि उन्हें तेलंगाना में ₹15,000 प्रति माह वेतन, और मुफ्त खाना-रहना मिलेगा। लेकिन वहां पहुंचने के बाद युवकों को स्टार बोरवेल में काम पर लगा दिया गया और उनके साथ मारपीट कर बंधक बना लिया गया। सभी के मोबाइल फोन छीन लिए गए और कहा गया कि उन्हें 6 महीने तक वहीं काम करना पड़ेगा।
17-18 सितंबर को किसी तरह से चंदूराम मरकाम ने अपने पिता संग्राम मरकाम को सूचना दी कि वे चारों युवक एक कमरे में जबरन बंद हैं और उन्हें बहुत तकलीफ दी जा रही है।
29 सितंबर को संग्राम मरकाम, धंसू सीकोद, डोमन लाल राठौर, गोपी देवांगन और अन्य परिजन बोलेरो वाहन से तेलंगाना पहुंचे। वहाँ ठेकेदार ने प्रत्येक युवक की रिहाई के बदले ₹1,80,000 की मांग की। काफी मिन्नतों और पैसों की व्यवस्था कर ₹35,000 नगद एवं ऑनलाइन माध्यम से भुगतान कर दो युवक – सनातराम नेताम पिता चैतराम और चंद्रशेखर मरकाम पिता संग्राम मरकाम को रिहा करवाया गया।
वहीं परमेश्वर पिता जनसंघ राम राठौर एवं भोजराज यादव, दोनों निवासी ग्राम निर्मिंडा, अब भी बंधक हैं। इसके अलावा युवकों को ले जाने वाला गोपी देवांगन भी ठेकेदार द्वारा वहीं रोक लिया गया है।
परिजनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि शेष युवकों को तत्काल मुक्त कराकर सुरक्षित लाया जाए और इस मानव तस्करी में लिप्त गोपी देवांगन एवं स्टार बोरवेल ठेकेदार के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही मजदूरी के नाम पर धोखाधड़ी और शोषण करने वाले ऐसे गिरोहों के खिलाफ विशेष जांच टीम गठित की जाए।
पीड़ित परिजनों ने इस पूरे घटनाक्रम से व्यथित होकर छत्तीसगढ़ महतारी की चरण वंदना कर अगरबत्ती व फूल अर्पित करते हुए सभी बंधक युवकों की कुशल वापसी के लिए प्रार्थना की।
बल्कि यह प्रशासन और समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि बेरोजगारी और गरीबी को हथियार बनाकर आदिवासी समुदाय को किस प्रकार शोषण का शिकार बनाया जा रहा है। समय रहते कार्रवाई न हुई, तो ऐसी घटनाएं और भी भयावह रूप ले सकती हैं।