वन विभाग की लापरवाही से परिक्षेत्र मुलमुला अंतर्गत नेवता में लगभग 150 से 200 एकड़ जंगल की अवैध कटाई का मामला सामने आया

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वन विभाग की लापरवाही से परिक्षेत्र मुलमुला अंतर्गत नेवता में लगभग 150 से 200 एकड़ जंगल की अवैध कटाई का मामला सामने आया

वन परिक्षेत्र मूलमुला के अंतर्गत ग्राम नेवता में बड़े पैमाने पर जंगल की अवैध कटाई का मामला सामने आया है, जिससे न केवल पर्यावरणीय नुकसान हो रहा है, बल्कि वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों की सूचना पर जब खबर आज की सच्चाई छुप नहीं सकती जिला ब्यूरो रिपोर्टर पहुंचा, तो वहां पर बड़े-बड़े पेड़ कटे हुए पाए गए। ग्रामीणों का कहना है कि इस कार्य में ग्राम पंचायत नेवता के सरपंच पति, पूर्व उपसरपंच, पूर्व वार्ड पंच, वन प्रबंधन समिति के सचिव और अन्य प्रमुख ग्रामवासी सक्रिय रूप से शामिल हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि इस अवैध कटाई की जानकारी उन्हें लगभग एक वर्ष पूर्व , संबंधित वन बीट गार्ड राकेश बैरागी को इस बारे में अवगत कराया। लेकिन बीट गार्ड ने मामले को गंभीरता से न लेते हुए महज “देख लेंगे” कहकर टाल दिया। एक साल बीत जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, और अब पुनः सूचना मिलने पर जब राकेश बैरागी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने गोलमोल जवाब देकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग के छोटे से लेकर बड़े अधिकारी तक इस अवैध कार्य में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं। पहले जंगल में आग लगना रेत का अवैध उत्खनन का मामला की गतिविधियों की खबरें आ चुकी हैं, और अब यह जंगल कटाई प्रकरण विभागीय मिलीभगत की पुष्टि करता है। ग्रामीणों के अनुसार नेवता के जंगलों में अब तक लगभग 150 से 200 एकड़ क्षेत्र का हरा-भरा जंगल नष्ट हो चुका है।

यह स्थिति सरकार के ‘जल, जंगल, जमीन’ बचाने के अभियान के ठीक विपरीत है। जहां एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर विभागीय कर्मचारियों की लापरवाही और अनियमिता से यह प्रयास विफल हो रहे हैं। ग्राम पंचायत नेवता में जिन व्यक्तियों को ग्राम का प्रमुख माना जाता है वही इस विनाशकारी कार्य में शामिल पाए गए हैं।

ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाऐ जाने पर वन विभाग कर्मियों एवं वन प्रबंधन समिति की सदस्योंऔर पूर्वपंचायत प्रतिनिधियों एवं वर्तमान जंगल कटने में सम्मिलित व्यक्तियों के नाम पर वन अधिकार के तहत ऋण पुस्तिका बनी है उन स्थानों की भी जांच करने के बाद ही ऋण पुस्तिका का भी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

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