विकास यात्रा में कर्ज के बारे में पूछे सरकार और प्रशासन !

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खरगोन – अखबारों में प्रकाशित मध्यप्रदेश सरकार की विकास यात्रा में मेरा मत है की कर्ज में डूबे परिवार की व्यथा को विशेष महत्व दिया जाय , मेरे पास नगर और आस पास ग्रामीण क्षेत्र के अनेक परिवारों का आना जाना होता है , उनकी बातो के आधार पर जब मैं सुनता हू , जिले के अनेक परिवार भयंकर कर्ज में वर्षो से जीवन जी रहे है , आत्महत्या के अनेक कारणों में एक कारण परिवारों पर लंबे समय तक कर्ज का जीवन जीना भी है , एक मामला मेरी आंखों के सामने का है , गांव के दो गरीब लोग सराफे की एक दुकान पर आए , दुकान बंद थी , मैं वही पास की दुकान पर खड़ा था , मेने उनसे पूछा क्या काम है ? मामला यह था , उस गांव के लोगो ने बीस हजार रुपए में सोने की रकम गिरवी रखी थी , तीन बार रकम छुड़वाने आए , दुकानदार टालता रहा , आने जाने में उनके दो हजार रुपए खर्च हो गए , मुझे बहुत उन गरीब पर दया आई , न तो दुकानदार ने उन्हें कोई रसीद दी , न उन्हे उसका मोबाइल नंबर याद था , मन में भाव आया अभी भी जिले के ग्रामीणों को केवल बीस हजार के लिए रकम गिरवी रखना पड़ती है , दूसरी ओर दुकानदार एक साथ सोना मुथूट या अन्य बैंक में कम ब्याज पर गिरवी रख देता है , अब बीच में ये बीस हजार रुपए वाले की रकम उसी इकठ्ठे सोने में होने के कारण वह व्यापारी इन्हे इसलिए नहीं दे पाता क्युकी इस छोटी रकम के लिए उसे मुथूट में ढाई लाख देने होंगे , मामला गंभीर है सरकार और प्रशासन दोनो विचार करे !

कर्ज के लिए आत्म हत्या के इतने प्रकरण है की दिल दहल जाए ! मेरा इसीलिए सरकार और प्रशासन से निवेदन है , दोनो विषय को विकास यात्रा में सम्मिलित करे , वास्तव में जिले में जेसे परिवार आंखो से हमे दिखाई दे रहे है , वैसा नही है , अनेक पिड़ाए है परिवार में , कोरोना और बढ़ती महगाई , व्यापार में प्रतिस्पर्धा के कारण आय घट रही है ! आशा है सरकार और प्रशासन दोनो विषयो पर गंभीरता से विचार कर इस पर ठोस निर्णय लेंगे !

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