*रायगढ़ के सन्यासी बाबा सत्यनारायण: 28 वर्षों से एक ही स्थान पर तपस्या में लीन*

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रायगढ़ जिले के डुमरपाली गांव में जन्मे बाबा सत्यनारायण (पूर्व नाम हलधर साहू) आज भी एक ही स्थान पर तपस्या में लीन हैं। 12 जुलाई 1984 को एक मध्यमवर्गीय किसान परिवार में जन्मे बाबा का बचपन से ही भगवान शिव के प्रति गहरा लगाव था।

उनकी माता हसमति साहू के अनुसार, जब वे कक्षा 7 में थे, तब स्कूल जाने के बहाने घर से निकले और अचानक लापता हो गए। परिवार ने काफी खोजबीन की, तब उनके मित्रों ने बताया कि वे कोसमनारा गांव के एक खेत में पहुंच गए हैं। 16 फरवरी 1998 को उन्होंने अपनी जीभ का अग्रभाग काटकर भगवान शिव को अर्पित कर दिया। इसके बाद वे एक ही स्थान पर बैठकर कठोर तपस्या करने लगे।

धीरे-धीरे बाबा सत्यनारायण के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था बढ़ती गई, और उनका नाम पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध हो गया। भक्तों के आग्रह पर जिस स्थान पर वे तपस्या कर रहे थे, वहां एक चबूतरा बनाया गया। 28 वर्षों से वे फल और दूध के भरोसे साधना में लीन हैं | दूर-दूर से श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए आते हैं।

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